Heat Wave क्या है? कैसे खतरनाक है हीटवेव? उष्माघात हिंदी में जानें। हीटवेव अलर्ट कब होता है? हीट वेव क्या होता है? इसके कारण, बचाव, अलनीनो, Heatstroke

 हीटवेव क्या है? कैसे खतरनाक है हीटवेव Heat Wave?: हिटवेव से अप्रैल 2023 में कई लोगों की मौत हो गई थी। इस विषय पर इस लेख में वो सब कुछ बताया गया है जो आपको जानना जरूरी है। Kya hota hai heat waveHeat Wave-in-Hindi-New जानें उष्माघात heat wave kya hai.

हीटवेव क्या है? कैसे खतरनाक है Heat Wave? उष्माघात हिन्दी में
Kya hota hai Heat Wave in Hindi New

हाल ही में, जलवायु परिवर्तन के कारण गर्मी की लहर से कम से कम 30 गुना अधिक हो गई थी। जो हिट इंडिक्स के मामले में 2 डिग्री सेल्सियस अधिक गर्म है। जिसके कारण अप्रैल 2023 में कई लोगों की मौत हुई थी। psychogyina.com  बेव बता रहा है हीटवेव कैसे खतरनाक है?

लूं या हीटवेव क्या होता है? हिटवेव का अर्थ अत्यधिक गर्म मौसम की अवधि है से जो आमतौर पर 2 या उससे अधिक दिनों तक चलती है। जब तापमान किसी दिए गए क्षेत्र के सामान्य औसत से अधिक हो जाता है तो उसे लूं या हीटवेब कहते हैं। मौसम विभाग के अनुसार भारत में हीटवेव मार्च से चलना शुरू होकर जून तक चलती है। नीचे विस्तार से 

हीट वेब का मतलब क्या है? Heat wave in Hindi 

Heat wave : हीटवेव का मतलब अधिक गर्म मौसम की अवधि है। तापमान का लगातार बहुत तेजी से बढ़ना हीट बेव की कहलाता है। 

 गर्मी के दिनों में तापमान का लगातार 43.5 डिग्री सेल्सियस या इससे ऊपर पहुंचना हीटवेब की ओर ले जाता है।हीट वेब को हम इस तरह परिभाषित कर सकते हैं- इसे भी पढ़ें: संसद भवन में स्थापित सेंगोल का सच 

  • अगर किसी क्षेत्र में बहुत लंबे समय तक जो तापमान है, वो बहुत तेजी से बढ़ता रहता है व 
  • तापमान बहुत ज्यादा गर्म रहता है। असहनीय गर्मी होती है तो ऐसी स्थिति को हम हीट वेब कहते हैं। 
  • तापमान का बहुत गर्म रहने, लगातार बढ़ने की वजह से मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है।
  • पर्यावरण पर प्रभाव पड़ता है और इन सबका समग्र प्रभाव अर्थव्यवस्था पर देखने को मिलता है।
  • चुकीं भारत एक उष्णकटिबंधीय देश है। इसका मतलब है भारत में जो सूर्य की ऊर्जा आती है
  • वो तुलनात्मक रूप से बहुत ज्यादा आती है। ऐसे में भारत में उष्मा तापमान ज्यादा रहती है
  • और इसी वजह से भारत को हीटवेव के लिए जिम्मेदार माना जाता है।

हीटवेव कैसे बनते है? Heat wave kya hota hai

दोस्तों, हीटवेव रुकी(फंसी) हुई हवाओं के कारण जन्म लेती है।

  • आमतौर पर हवा बड़ी प्रचलित हवाओं में ग्लोब का चक्कर लगाती है।
  • गर्मी की लहरें जब वातावरण में उच्च दबाव वाली हवा को नीचे की ओर ले जाती है। और गर्म हवा को जमीन की ओर धकेलता है। 
  • और फिर वह जमीन के पास हवा को आगे बढ़ने से रोकती है। 
  • नीचे बहने वाली हवा एक स्थान पर संकुचित होकर गर्म हवा के रूप ले लेती है, जिससे की हीटवेव बनता।
  • और हम बहुत अधिक गर्मी महसूस करने लगते हैं। यही प्रक्रिया हीटवेव के रूप में चलती है। 

हीटवेब के कारण क्या है? heat wave 

जलवायु परिवर्तन:(यानी कि ग्लोबल वार्मिंग क्लाइमेट चेंज)

  • हम जानते हैं कि दुनिया भर में मानवीय गतिविधियों के वजह से बहुत व्यापक स्तर पर
  • ग्रीन हाउस, गैस, उतकों (GHG का) उत्सर्जन हो रहा है ।
  • इसी ग्रीनहाउस गैस की वजह से दुनिया भर का जो तापमान है, लगातार एक स्तर से बढ़ता जा रहा है। 
  • और इसी तापमान के बढ़ने का प्रभाव है कि दुनिया भर के तमाम क्षेत्रों में, हीटवेब की ज्यादा घटनाएं देखने को मिल रही है।
  • ऐसे में आजीविका सुरक्षा पर दबाव भी पड़ सकता है।

शहरीकरण: हम जानते है कि शहरीकरण लागातार बढ़ रहा है। हम शहरों का निर्माण कर रहे हैं।

  • शहरों के बनाने के प्रक्रिया के दौरान हम लगातार कंक्रीट के जंगल बना रहे है।
  • इन जंगलों में बिल्डिंग मौजूद है। ये बिल्डिंग उष्मा को बड़े लेवल पर ट्रेप करती है।
  • जहां हीट डोम का फेनामोना भी देखने को मिलती है। जो कि अक्सर शहरों में देखने को मिलता है।
  • जहां पर एक विशेष क्षेत्र का जो तापमान है वह बहुत बड़े स्तर पर बढ़ जाता है।

अलनीनो : इसके अलावा इसको अलनीनो से जोड़कर भी देखा जाता है।‌ 

  • अलनीनो की घटना के दौरान प्रशांत महासागर और इसके आसपास का जो तापमान है वो तेजी से बढ़ता है
  • अलनीनो की घटना एक नियमित चक्र नहीं है, बल्कि 2 से 7 साल के बीच अनियमित रूप से घटित होती है
  • और अलनीनो का प्रभाव भारत पर पड़ता है। इसी वजह से भारत का तापमान जब बढ़ता है
  • तो उसका प्रभाव हमें हीटवेब के तौर पर देखने को मिलता है।

आप जानना चाहेंगे अल नीनो क्या है ?

अल नीनो भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में सतह के जल के असामान्य रूप से गर्म होने को संदर्भित करता है।

अल नीनो सामान्य तौर पर पृथ्वी को गर्म करने में अपनी भूमिका निभाता है। 

जबकि अल नीना इसे ठंडा करता है। जलवायु विज्ञानियों के अनुसार, अलनीनो 'दक्षिणी दोलन' उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के ऊपर हवा के दबाव में बदलाव है।

भारत में अलनीनो कमजोर मानसून और सामान्य से कम वर्षा से जुड़ा हुआ है, 

क्योंकि यह हवाएं भारतीय के ग्रीष्मकालीन मानसून का प्राथमिक स्रोत है। इसे ENSO भी कहते हैं।

हीटवेब : खतरनाक आपदा है जानें कैसे? 

क्या हीट वेब की वजह से मौत हो सकती है: वैसे तो प्राकृतिक तौर पर हीटवेब इतनी खतरनाक नहीं होती है। 

  • लेकिन ऊर्जा, उष्मा, हीट, तब इतनी ज्यादा खतरनाक हो जाती है। 
  • जब तापमान और आर्द्रता में एक साथ बढ़ोतरी होती है।
  • इस घटना को 'बेट बल्ब टेम्परेचर' के नाम से भी जाना जाता है। 
  • ये घटना बहुत ज्यादा गंभीर होती है। इस घटना के कई उदाहरण भी देखने को मिले थे।
आपको बता दूं कि बीते दिनों इसी साल अप्रैल महीने में मुंबई के सरकार द्वारा एक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा था, यह कार्यक्रम ओपन ऑडिटोरियम में था।

ऐसे में लोग जब वहां पहुंचे तो 13 लोगों की मौत हो गई। लेकिन जब वहां के मौसम के आंकड़ों को देखेंगे| तो पता चलेगा कि उस समय उस क्षेत्र का तापमान 30 से 35 डिग्री के आसपास था।

आप पूछना चाह रहे होंगे फिर मौत कैसे हो गई?

  •  इसके रिसर्च के दूसरे आंकड़ों से पता चलता है कि उस समय वहां का जो आर्द्रता थी
  • वो औसत से बहुत ज्यादा अधिक थी।
  • इसी की वजह से जब दोनों (तापमान और आर्द्रता) का मिश्रण हुआ तो हमें 'बेट बल्ब टेंपरेचर' का फिनोमिना देखने को मिला।
  • और इसकी वजह से कई लोगों की मौत हो गई।
  • इसी तरह से और कई आंकड़े कई उदाहरण हैं। इसी तरह से एक और घटना बालिया में हुई।
  • यह घटना उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में भी देखने को मिली।
जहां उस क्षेत्र का तापमान 43.5 डिग्री तापमान के साथ आर्द्रता 31% थी।

जिसका हीट इंडेक्स निकलकर 51डिग्री सेल्सियस के आसपास था। 

इसका मतलब है ये हुआ कि उस समय मानव शरीर 51 डिग्री  सेल्सियस तापमान झेल रहा था।

ऐसे में कई लोग इस तापमान को नहीं झेल सके और इसी वजह से उन्हें अपनी जान गवानी पड़ी।

हीट इंडेक्स क्या है ? Heat index 

हिट इंडेक्स को रियल फील टेंपरेचर भी कहते हैं। 

  • इसका मतलब ये होता है कि एक निश्चित समय में  मानव शरीर को कितना ज्यादा तापमान महसूस हो रहा है।
  •  दोस्तों आपने देखा होगा कि हमारे आसपास का जो तापमान है, 
  • कम होते हुए भी कभी-कभी बहुत ज्यादा महसूस होता है। और कई बार इसके विपरीत भी होता है। 
  • हमारे वातावरण का तापमान ज्यादा होता है लेकिन हमें महसूस कम होता है
  • तो इसके लिए मुख्य तौर पर रियल फील टेंपरेचर नापा जाता है।
  • जिसमें देखा जाता है कि तापमान बहुत कम है लेकिन वहां पर आर्द्रता बहुत ज्यादा है।
  • ऐसे में आपको बहुत ज्यादा तापमान महसूस होगा।
  • दूसरी ओर अगर किसी क्षेत्र का तापमान ज्यादा है लेकिन वहां पर हवा चल रही है 
  • तो हवा चलने की वजह से आपको वहां पर बहुत ज्यादा तापमान महसूस नहीं होता।
  • बहुत ज्यादा गर्मी नहीं लगेगी, तो इसी फेनामिना को हम हीट इंडेक्स टेंपरेचर (heat index temperature) कहते हैं।

कैसे खतरनाक है हीटवेव? Heat wave का विज्ञान 

  • जब आप गर्म होते हैं तो आपको पसीना आता है। इससे आप तरल पदार्थ और इलेक्ट्रोसाइट्स खो देते हैं।
  • शरीर में मौजूद ऊष्मा को बाहर निकालने के लिए पसीने काम करते है।
  • यह पसीना वाष्प बन कर लुप्त हो जाता है। इसी वजह से हमारे शरीर में शीतलन का प्रभाव आता है।
  • शरीर का तापमान संतुलित बना रहता है। उसमें संतुलन देखने को मिलता है। 
  • लेकिन अगर किसी क्षेत्र में जो आर्द्रता है वो बढ़ जाती है
  • तो ऐसे में पसीने को वाष्पित होने में बहुत मुश्किल का सामना करना पड़ता है।

https://www.psychologyina.com/2023/06/------Heat-Wave--Hindi-.html
हीटवेव क्या है? कैसे खतरनाक है Heat Wave? उष्माघात हिन्दी में

इसको समझने के लिए आप कपड़ों का उदाहरण ले सकते हैं। 
  • जब किसी क्षेत्र में आर्द्रता बहुत ज्यादा होती है। वहां पर कपड़े सूखाने में ज्यादा दिक्कत आती है।
  • पसीने के साथ भी कुछ ऐसा ही होता है। इसको वाष्पित होने में बहुत समय लगता है।
  • ऐसे में हमारे शरीर का जो संतुलन सिस्टम है वह बिगड़ जाता है
  • और हमारे शरीर में उष्माघात(hitstroke) देखने को मिलता है। Heat stroke (उष्माघात) आता है।

 जहां पर हमारे शरीर का जो तापमान है वो 40 डिग्री के आसपास रहता है। यानी Real feel temperature या जो Temperature Index है वो अगर 40 डिग्री से ज्यादा है। तो वहां पर उष्माघात की घटनाएं देखने को मिल सकती है।इसके अलावा इसका एक और विज्ञान है। 

  • जब भी हमारे शरीर के आसपास उष्मा बहुत ज्यादा हो जाती है। 
  • तब इसकी वजह से मेटाबॉलिज्म से रिलेटेड जो एक्टिविटीज है, वो भी बढ़ जाती है।
  • जब मेटाबॉलिज बढ़ जाता है तो इसके प्रभाव से पसीने में वृद्धि होती है।
  • इसकी वजह से रक्तचाप है और जो ऑक्सीजन के स्तर है दोनों लगातार गिर जाते हैं।
  • इन समस्यो से हमारे शरीर में हाइपोक्सिया देखने को मिल सकता है।
  • हाइपोक्सिया के गंभीर लेवल की वजह से मौत भी हो सकती है।

कब जारी होता है हीटवेव अलर्ट : heat wave Alert 

भारतीय मौसम विभाग की MIT के अनुसार, अगर किसी क्षेत्र में जो तापमान है। जैसे- मैदानी इलाका (40 डिग्री), पहाड़ी इलाका (30 डिग्री), तटीय इलाका (37 डिग्री) से ज्यादा चला जाता है तो ऐसी स्थिति में वहां पर हीटवेव को डिक्लियर किया जाता है। इनसे नीचे की तापमान को हीटवेव डिक्लेअर नहीं करते हैं। 

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हिटवेव से बचाव के उपाय 

हीटवेव या लूं से बचना जरूरी है। जरा सा लापरवाही हीट स्ट्रोक, डीहाइड्रेशन और डायरिया जैसी कई बीमारियों का खतरा बढ़ा जाता है। इसीलिए बचाव के उपायों को जानना जरूरी है -

  1. शरीर को रखें हाइड्रेटेड ।
  2. सॉफ्ट ड्रिंक्स के सेवन से बचें।
  3. ज्यादा तेल मसाले और तने होने वाला भोजन ना खाएं
  4. बाहर निकलते समय शरीर को अच्छे से कवर करें अपने पास पानी की बोतल रखें। 
  5. घर से बाहर खाली पेट ना निकले। शरीर पर हल्के रंग का सूती वस्त्र का इस्तेमाल करें ।
  6. लिक्विड चीजों का सेवन ज्यादा करें।
  7. शरीर को ठंडा रखने वाली पदार्थों का सेवन करना चाहिए।

सारांश 

हिटवेव को गर्म और असामान्य रूप से आर्द्रता वाले मौसम की अवधि के रूप में परिभाषित किया गया है। आमतौर पर यह लहर दो या अधिक दिनों तक चलती है।

क्षेत्रों में औसत से ज्यादा तापमान होने पर उष्माघात हो होता है। सरकार द्वारा बनाये योजनाओं से मिल सकती है राहत।Also see

 गर्मी या लू से बचाने वाली प्रभावी उपायों जैसे कि पानी तक पहुंच, ओरल पुनर्जलीकरण समाधान (ORS) विशेष रूप से सार्वजनिक स्थानों पर कार्य स्थलों पर, लचीले काम, कम घंटे का काम तथा बाहरी श्रमिकों के लिए विशेष व्यवस्था के माध्यम जैसे छाया प्रदान कर कम किया जा सकता है।

आज आपने इस लेख से सीखा कि हीटवेब क्या है?उष्माघात क्यों होता है? रियल फील टेंपरेचर क्या है? और बेट बल्ब टेंपरेचर? के बारे में भी जाना। और कोई सवाल हो तो आप हमें कमेंट में पूछ सकते हैं। धन्यवाद !

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