मानव स्वभाव और उनके व्यवहार[Laws of Human Nature And Behaviour]: बॉडी लैंग्वेज
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| मानव व्यवहार के सिद्धांत : बॉडी लैंग्वेज |
The Laws of Human Nature And Behaviour : बॉडी लैंग्वेज
• परिचय
अमेरिकन ऑथर रॉबर्ट ग्रीन का बुक द लॉ ऑफ ह्यूमन नेचर इसमें उन्होंने ऐसे कई नियम लिखें हैं जो पिछले सौ सालों से कई महान मनोवैज्ञानिक और दार्शनिक जैसे- Dr. Carl Jung, Sigmund Freud, Friedrich से Author Schopenhauer प्रेरित है। जो कहते है -
रार्बट ग्रीन के हिसाब से हम साइकोलॉजी और उन सारी तथ्यों को भूल चुके हैं। जो लोगों को कुछ भी करने के लिए प्रेरित करता है। और यही चीज लोगों को आगे बढ़ने और अपने दुखों को दूर करने से रोकती है। अगर किसी इंसान से अपनी बात मनमानी तो उन्हें वो नहीं आता।
तर्कहीनता का नियम
The Law of Irrationality - एक इंसान होने के नाते हमें ऐसा लगता है कि हमारा थॉट प्रोसेस बहुत रैशनल है और हम अपनी लाइफ को पूरी तरह कंट्रोल कर पा रहे हैं। लेकिन वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत होती है।
- हमारी इमोशंस हमें गाइड करते हैं प्लेजरेवल चीजों के पास जाने के लिए और दर्द देने वाली चीजों को होल्ड करने है
- इसी वजह से हम दुनिया को वैसे देखते हैं जैसे हम यकीन कर रहे होते हैं बजाय इसके जैसी वो असल में है
- इसलिए ज्यादा तर्कशील बनने के लिए इनरैसनल साइड को बाहर आते हुए पकड़ो
- जैसे- जब आप को एकदम से गुस्सा आ जाता है, आपके अंदर किसी इंसान की ओर बहुत नफरत आती है
- कोई भी चीज बहुत इरिटेट या फिर अपनी तरफ अट्रैक्ट करती हो, तो अपनी इमोशन को पकड़ो
- और उससे मतलब कि खुद से प्रश्न करना शुरू करो कि आप को एकदम से गुस्सा क्यों आया या खिन्नता क्यों हुई।
- यह क्वेश्चन आपको अपनी असली डरों और मोटिवेशन के पास पहुंचेगा ।
- और जब बात आती है दूसरे लोगों की अतार्किकता की तो उन्हें चेंज करने के बारे में मत सोचो क्योंकि इससे बस आपके रिश्ते खराब ही होंगे।
संकीर्णता या अंहकार का कानून या नियम
The Law of Narcissism Human - रार्बट ग्रीन के हिसाब से सेल्फ लव का स्पेक्ट्रम या फिर स्किल होता है
- अगर किसी व्यक्ति अंदर बहुत कम सेल्फ लव होता है तो वह हर समय खुद को ही डाउट करता है
- खुद की ही कमियां निकाल कर अपने आप को आगे बढ़ने से रोकते हैं
- और अगर आप में सेल्फ लव हद से ज्यादा है तो उस केस में भी वह टॉक्सिक बना जाता है
- और आप खुद की वैल्यू मिलने वाली अटेंशन को प्राथमिकता देने लगते हो।
- इस पॉइंट पर हम हर चीज को बहुत पर्सनल लेने लगते हैं और दूसरों को हम कंट्रोल या डोमिनेट करने की कोशिश करते हैं।
- बचपन में हम प्यार महसूस करने के लिए दूसरों पर डिपेंड होते हैं
- अटेंशन ऐसा महसूस कराती है की मानो सब कुछ मिल गया है जो अंहकार को मैटर करता है।
- लेकिन यही बड़े होने पर वही सोच हमें टॉक्सिक और अपरिपक्व बनाता है।
- इसलिए रार्बट सलाह देते हैं कि अपने narcissism, अपने सेल्फ लव सेशन को अंत तक बदलने की कोशिश करनी चाहिए
- यह संभव होगा खुद से फोकस हटाकर दूसरों से पूछना कि वह कैसा महसूस कर रहे हैं और वो क्या उनकी जरुरत है।
भूमिका निभाने का नियम
The Law of Role playing - नकाब पहनकर अपने आपको ऐसा दिखाते हैं कि हम कितने अच्छे इंसान हैं, नैतिक और सबसे बेहतर है, और हमारी तो कोई इनक्योरीटी है ही नहीं।
- यह ज्ञान हमें बताती है कि किसी भी चीज की टोटल मार्क्स से हमें उसे जज नहीं करना चाहिए।
- चाहे अच्छा-बुरा, ज्यादा- कम इत्यादि।
- ताकि जब वो अपना असली चेहरा दिखाएं तब आपके लिए आश्चर्यजनक हो।
- किसी भी इंसान की उनकी असली चेहरा और उनकी अवचेतन इच्छा को पकड़कर पता लगा सकते हो,
- उनकी बॉडी लैंग्वेज से की असलियत क्या है।
- जैसे- कौन सी बातों पर उनकी फेशियल एक्सप्रेशन बदल जाते हैं और जहां वह पहले खुश थे वहीं वो नाराजगी दिखाने लगे।
- इस तरह अपने फैसले लेने या देने/थोपने से बच सकते हैं कि
- वो आपके किस बात/काम से सहमत हैं या नहीं पता लगा सकते हैं
- रार्बट ग्रीन हमें इंसानों का एक अच्छा रीडर बनने को बोलते हैं
- क्योंकि यह कौशल आपको किसी के भी दिमाग में क्या चल रहा है ये भी बता पाएगी
- और दूसरों को कब अकेला छोड़ देना चाहिए और कब उनकी मदद करनी चाहिए इसमें भी सहायता करती है।
आत्म तोड़फोड़ का कानून
The Law of Self- Sabotage- हर इंसान के दुनिया को देखने का नजरिया और अपने आसपास के हर व्यक्ति का किसी चीज को इनटरपेट करने का तरीका अलग होता है
- हमारा यही डिफरेंट एटीट्यूड यह तय करता है कि हमारी हमारी लाइफ में क्या होगा
- अगर हम नेगेटिव पैटर्न में अटके हुए हैं।
- अगर मुश्किल हालात में बहुत डर जाते हैं
- और हर चीज को ही एक नेगेटिव तरीके से देखते हैं
- तब हम और हमारे कैरियर और लाइफ में उन्हीं को रियलिटी बना देते हैं, जिससे हम सबसे ज्यादा डरते हैं।
- इसे हम बोलते हैं self-sabotage या फिर खुद के पैर ही कुल्हाड़ी मार देना।
- लेकिन हमारे इस नज़रिया को बदलना संभव होता है
- अगर हम अपने माइंड को ज्यादा सकारात्मक, ज्यादा खुला और ज्यादा सहनशील बनाए तो।
बाध्यकारी व्यवहार का नियम
- हमारे चरित्र के ज्यादातर पहलू हमारे बचपन में ही फिक्स हो जाते हैं।
- बाकी हम अपनी रोजमर्रा की आदत के द्वारा बनाते हैं।
- कई ऐसी चीज होती है जो हमें अपनी एक्शन को दोहराव करने को बोलती है
- चाहे वह अच्छे हो या बुरे जैसे- अपनी बॉडी का ख्याल रखना अपने आप का ख्याल रखना
- और दूसरों से अच्छे से पेश आना या फिर बुरे काम जैसे- स्मोक करना या फिर हर इंसान से बदतमीजी से बात करना, गाली देना।
- इसलिए जब भी आप किसी इंसान के साथ काम करने की सोचिए तो
- सामने बाले की बाहरी आवरण के तरीके देखें और उसके कैरेक्टर को विश्लेषण करें। वो मुश्किल हालातों में कैसे अडॉप्ट करते हैं।
- लोगों को कैसे ट्रीट करते है और उनका पिछला व्यवहार कैसा रहा है आदि।
