सपिंड विवाह क्या है। Kya h Sapinda marriage.हिंदू विवाह अधिनियम।धारा5।3(f),14?क्या भारत में सपिंड विवाह कानूनी है?सपिण्ड विवाह से क्या तात्पर्य है?DHC

 सपिंडा विवाह [Sapinda Marriage] क्या है :देश में एक शादी चर्चा का विषय बना हुआ है। पिछले दिनों दिल्ली हाईकोर्ट में एक मामला पहुंचा जिसमें एक महिला ने हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 5(V) को चुनौती दी है। इसके बाद यह विवाह सुर्खियों में बना हुआ है। इस विवाह को सपिंडा विवाह कहा गया है। दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले से चर्चा का विषय बना Sapinda Vivah का आखिर क्या है पूरा मामल इस लेख में जानेंगे। सपिंड से आप क्या समझते हैं? सपिंड शादियां क्या होती है आईए विस्तार से जानते हैं 

सपिंड विवाह [Sapinda Marriage] क्या है? Delhi HC ने इस पर क्यों लगाई रोक।
सपिंड विवाह [Sapinda Marriage]

WHAT IS SAPINDA MARRIAGE: हमारे समाज के अंदर ऐसी कई सारे रिश्ते आपके घर परिवार आसपास पड़ोस सेलिब्रिटी बड़े-बड़े प्रसिद्ध लोगों में भी इस तरह के रिश्ते देखने को मिल जाते हैं जिन्होंने सपिंडा विवाह किया हुआ है । तो क्या कोर्ट इस तरह के रिश्ते को मानता है? 

Hindu Marriage Act 1955 : समाज के संतुलन को बनाए रखने के लिए हमारे पूर्वजों ने विवाह जैसे संस्कार को बनाया है। अगर बिना नियम लड़के या लड़की चुनने की छूट दी जाए तो अनाचारपूर्ण रिश्ते बनेंगे। यह एक्ट बताती है कि किस संपिड शादी को वैध और किस शादी को अवैध करार दिया जाय।

सपिंडा विवाह [Sapinda Marrage] क्या है?

Sapinda Vivah kya hota hai: सपिंड विवाह एक विशेष प्रकार का विवाह प्रणाली है 

  • जिसमें एक व्यक्ति अपनी बहन यानि मामा या फुआ के पुत्त्री से विवाह करता है या करवाना सपिंड विवाह कहलाता है। 
  • जिसमें विवाह होता है वह एक ही समूह यानी पूर्वज के अंतर्गत होते है। 
  • इस विषय को पहली पीढ़ी के रूप में गिना जाता है जो सपिंडा सीमा को परिभाषित करता है। 
  • इसमें विवाह करने वाले व्यक्तियों के पिता कजन मतलब एक ही सपिंड के होते हैं, 
  • जो आपस में खून के नजदीक के रिश्तेदार होते हैं (जिसे हम दूर के रिश्तेदार कह कर बुलाते हैं 
  • और शादी करवा देते हैं कि ये तो दूर के रिश्तेदार है)। 
  • हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 3 (f)ii) के तहत दो लोगों के पूर्वज अगर एक ही थे तो 
  • उनके विवाह को सपिंड विवाह माना जाता है।

सपिंडा विवाह से क्या तात्पर्य है?

Kya hai Sapinda sambandh :सपिण्ड संबंध मतलब तय सीमा तक निकटता के भीतर एक दूसरे से संबंधित होते हैं।

  • जब तय सीमा के अंदर दो लोगों का एक ही सामान्य पूर्वज (common ansister) होता है 
  • तब ऐसे शादी को हिंदू धर्म में या हिन्दू विवाह अधिनियम के तहत वर्जित माना गया है। 
  • Hindu Marriage ACT इसे Null and void मानता है। शुन्य शादी।
  • सपिंड से तात्पर्य (गर्भाशय रक्त) आहुति सिद्धांत (ऑब्लेशन थ्योरी)। 
  • विज्ञानेश्वर सिद्धांत(एक ही शरीर के कण) है। -ऋषि याज्ञवल्क्य 

सपिंड से आप क्या समझते हैं: दो लोग जिनके पूर्वज अर्थात गोत्र/कुल/पिंड/वंश एक हो। स+पिंड अर्थात मृत व्यक्ति को पिंडदान। दोनों एक ही पूर्वज को पिंडदान करते हो उन्हें सपिंड कहेंगे। 

  • क्योंकि दो व्यक्ति एक दूसरे का सपिंड कहे जाते हैं यदि एक व्यक्ति सपिंड रिश्तें की तय सीमा में दूसरे का वंशज है 
  • या यदि उनमें से प्रत्येक के संदर्भ में सपिंड संबंध की सीमा के भीतर एक सामान्य अपरिवर्तनीय वंशानुगत विवाह हो।
  • कानूनी दृष्टि से यहां पर विभिन्न भारतीय राज्यों में इस पर अलग-अलग नियम हो सकते हैं, 
  • और स्थानीय कानून के अनुसार इसे वैध या अवैध की मान्यता प्राप्त होती है।

सपिंड विवाह में कितनी पीढ़ियों तक शादी नहीं किया जाता है?

  • हिंदू समाज में सपिंड विवाह एक परंपरागत विवाह प्रणाली है जो भारतीय संस्कृति में प्रचलित रहा है।
  • सपिंड वे रिश्तेदार होते हैं जिनके पूर्वजों का कुछ पीढियों तक का खून एक ही होता है 
  • यानी पुर्व में जिन दो परिवारों ने आपसी रिश्ते बनाएं उनके वंशजों के बीच हुए विवाह को सपिंड विवाह कहा जाता है। 
  • इसका मतलब यह है कि पिता की तरफ से 5 पीढ़ी और माता के तरफ से 3 पीढ़ी में शादी करना वैध नहीं माना गया है। 
  • मतलब की अपनी मां की ओर से कोई व्यक्ति अपने भाई-बहन (पहले पीढ़ी), माता-पिता (दूसरी पीढ़ी) अपने दादा-दादी (तीसरी पीढ़ी) 
  • और पिता के तरफ से इसके अलावा यानी दादा-दादी के दादा-दादी तक विवाह पाबंदी है। 
  • किसी ऐसे व्यक्ति से शादी नहीं कर सकते है जो 3 और 5 पीढ़ी के अंदर उसी वंश से आते हैं। 

क्या भारत में सपिंड विवाह कानूनी है। 

आपके मन में सवाल चल रहा होगा तो क्या अब तक हुई सपिंड विवाह अवैध है या वैध ? किन स्थितियों में सपिंड विवाह को अवैध माना जाएगा और किन स्थितियों में वैध : 

क्या भारत में सपिंडा विवाह कानूनी है? Sapinda Vivah वैध या अवैध?
Sapinda Marriage: Delhi HC के फैसले 

  • सपिंड विवाह परंपरागत विवाह प्रणाली है जो सामाजिक और पारंपरिक तत्वों पर आधारित है।
  • कोर्ट किन्ही दो हिंदू व्यक्तियों के बीच मातृ पक्ष की तीन पीढियां 
  • और पैतृक पक्ष की पांच पीढियो में हुई शादी को सपिंड विवाह मानते हैं।
  • अगर लड़का और लड़की दोनों के समुदाय में सपिंड शादी का रिवाज है तो वह ऐसी शादी कर सकते हैं
  • लेकिन इसमें शर्त यह है कि 
  • इस रिवाज को बहुत ही लंबे समय से लगातार और बिना किसी बदलाव के मान्यता मिलनी चाहिए। 
  • हां अगर विवाह के समय लड़की या लड़के को अपनी एक ही पूर्वज होने का बारे में पता ना हो 
  • और अनजाने में या धोखाधड़ी से बेवकूफ बनाकर विवाह की गई हो या करवाई गई हो 
  • तो कोर्ट आपकी इसमें मदद करता है आपका हक में न्याय दिलाता है 
  • और अगर कोई गैर कानूनी तरीके से सपिंड शादी करता है 
  • तो उन्हें हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 18(a) के तहत धारा 5 का उलंघन करने के जुर्म में सजा और जुर्माने का प्रावधान है। 
  • ऐसा नहीं है कि आपको पता है उसके बाद भी आपने शादी की और फिर बाद में इसे आधार बनाकर कोर्ट में अलग होने चले गए।
  • क्योंकि अदालत तथ्य की भूल allow करता है लेकिन विधि की भूल अलाउड नहीं करता है।
  • लेकिन दक्षिण भारत, केरल आदि जैसे कुछ स्थानों पर यह शादी मान्य है।

सपिंड विवाह पर रोक |DHC

SAPINDA MARRIAGE पर कोर्ट ने महिला की याचिका क्यों खारिज कर दी। पूरा ममला : महिला ने अपनी याचिका में कहा कि उसकी शादी मान्य होनी चाहिए। 

  • लेकिन कोर्ट ने उसे अमान्य करार देते हुए कह दिया कि यह सपिंड विवाह हुआ है इसीलिए यह विवाह कानून में मान्य नहीं है। 
  • अगर कोई विवाह धारा 5 का उल्लंघन करता है तो यह शादी अमान्य होगा। 
  • इसका मतलब यह होगा कि विवाह शुरू से ही सामान्य था और ऐसा माना जाएगा जैसे कि यह विवाह कभी हुआ ही नहीं। 
  • बता दे कि यह मामला 1998 का है एक महिला की शादी उसके पिता के कजिन भाई के बेटे से हुआ था।
  • हिंदू संस्कारों और रिति रिवाजों के मुताबिक हुई थी।
  • कानूनी और सामाजिक तौर पर फिर कुछ सालों बाद
  • यानी साल 2007 में इस विवाह को सपिंड विवाह करार दिया गया।
  • जब महिला की पति ने यह साबित किया की पत्नी के तरफ से सपिंड विवाह हुआ है हमारा 
  • और उनकी पत्नी के घर की तरफ से ऐसे विवाह को मान्यता नहीं दी गई है 
  • कानून भी इस प्रकार के विवाह को वैध नहीं मानता है तो मेरी इस विवाह को अवध करार दिया जाए।
  • इस पर महिला हाई कोर्ट पहुंच जाती है तब मामला मौलिक अधिकार का बन जाता है। 

क्या सपिंड विवाह में रोक मौलिक अधिकार को चुनौती देता है।

  • जब महिला के पति 2007 में कोर्ट में यह साबित किया था कि उसकी शादी सपिंड थी 
  • और महिला के समुदाय में ऐसी शादी नहीं होती है।
  • उसके बाद अदालत इस शादी को अवैध घोषित करते हुए कोर्ट ने कहा 
  • कि पति-पत्नी ऐसे समुदाय से आते हैं जहां शादियां हिंदू मैरिज एक्ट के तहत होती है 
  • यानि पति और पत्नी दोनों अपने पिता की चौथी पीढ़ी के हैं जो सगे भाई के संतान हुए।
  • इसीलिए यह हिंदू मैरिज एक्ट के धारा 5 का उल्लंघन करता है। 
  • तब महिला ने दलील देते हुए कहा आखिर विवाह तो हो ही गया है। 
  • संविधान का अनुच्छेद 14 मौलिक अधिकार यह कहता है कि किसी को भी अपने मनपसंद से जीवनसाथी चुनने का अधिकार है। 
  • किसी भी जाति, धर्म या किसी से भी शादी करने की आजादी है तो सपिंड विवाह मान्य क्यों नहीं है। 

  • चुकी इस देश में समानता का अधिकार है हर किसी के लिए समान अधिकार है । 

  • इस पर अदालत ने कहा की याचिकर्ता यह साबित करने में कोई ठोस (logical prove) कानूनी आधार नहीं दे पाया/दिया है 
  • कि हिंदू मैरिज एक्ट के तहत सपिंड शादियों को रोकना संविधान के अनुच्छेद 14 के बराबरी के अधिकार का उल्लंघन है। 
  • इसीलिए सपिंड विवाह को रोकना मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं है। 
  • ट्रायल कोर्ट ने माना की पत्नी अधिनियम धारा 11 के दायरे में अपना मामला साबित करने में विफल रही है।
  • इसलिए पक्षधर न ही भरण पोषण का हकदार रही।
  • ऐसे हालत में याचिकर्ता को संयम से कम लेने चाहिए। कुछ चीजें छुटी है, जिंदगी खत्म नहीं हुई है।
  • तो इस मामले में सपिंड विवाह के रिवाज को भी कानून की नजर में वैध नहीं माना गया है। 
  • कोर्ट ने हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 5 की संवैधानिक वैधता को जारी रखता है। 
अदालत ने देश और समाज की संतुलन को बनाए रखने के लिए हमारे भारतीय संविधान में Hindu Marriage Act के प्रावधान 1955 की वैधता को बरकरार रखा। 

हालांकि धारा 16(3) के अनुसार ऐसे रिश्तों में बच्चों के संपत्ति अधिकार पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाते।

निष्कर्ष:

उम्मीद है आपको यह लेख पढ़ कर अच्छा लगा होगा काफी सारी जानकारियां मिली होगी समझ पाए होंगे कि सपिंडा विवाह क्या है। 

  1. आपके पूर्वजों में ऐसी शादियों का रिवाज/प्रथा है जहां नजदीकी परिवारों में शादियां होती है। जिसे आप साबित कर सकते हैं ?।
  2. अगर ऐसी रिवाज नहीं है तो Delhi HC पैतृक पक्ष से 5 और मातृ पक्ष से की 3 पीढियों में हुई सपिंड मैरिज को अमान्य घोषित करता है। 
  3. हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 5 का उल्लंघन करते हुए निषिद्ध संबंध की डिग्री के कारण 
  4. विवाह कानून की नजर में शून्य घोषित होने पर पक्षधर किसी भी प्रकार का भरण पोषण का हकदार भी नहीं होता है।

संदर्भ :

[यह मामला नीतू ग्रोवर बनाम गगन ग्रोवर, 2023 एससीसी ऑनलाइन डेल 6367, निर्णय 9-10-2023 को] 

इसे भी पढ़ें

एंजायटी कैसे दूर होगा 

Premenstrual-Syndrom (PMS) क्या है? जानिए कारण, लक्षण और उपाय

Read more